मध्यप्रदेश में रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार : दो साल में 5,200 किमी ट्रैक, देश में चौथा स्थान

भोपाल :  मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों के दौरान रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश अब देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क बनकर उभरा है। राज्य में रेलवे ट्रैक की कुल लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का लगभग 7.6 प्रतिशत है।

रेलवे बजट में भी अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। जहां वर्ष 2009 से 2014 के बीच प्रदेश को औसतन 632 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट मिलता था, वहीं अब यह बढ़कर 15,188 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वर्तमान में 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाएं विभिन्न चरणों में संचालित हैं।

आर्थिक विकास को मिलेगी गति : बेहतर रेल कनेक्टिविटी से राज्य में व्यापार, उद्योग और पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिससे आने वाले वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

प्रदेश में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। साथ ही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम सहित कई स्टेशनों का पुनर्विकास किया गया है, जबकि 74 अन्य स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है।

कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार : जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे पर्यटन स्थलों जैसे कान्हा नेशनल पार्क और धुआंधार जलप्रपात तक पहुंच आसान होगी। वहीं इंदौर-मनमाड रेल परियोजना से मालवा-निमाड़ क्षेत्र के धार, खरगोन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ मिलेगा।

नई रेल सेवाओं के तहत रीवा-पुणे, जबलपुर-रायपुर और ग्वालियर-बेंगलुरु के बीच ट्रेनें शुरू की गई हैं, जिससे प्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत हुई है।

बड़े प्रोजेक्ट्स से रोजगार और निवेश :  इंदौर-मुंबई के बीच 309 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन को भी मंजूरी मिली है, जिसकी लागत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इस परियोजना से लगभग 1,000 गांवों और 30 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा रायसेन जिले में 1,800 करोड़ रुपये की लागत से रेल कोच निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है, जिससे 5,000 से अधिक रोजगार सृजित होंगे।

नई परियोजनाओं पर तेजी से काम : भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन, इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी लाइन जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम चल रहा है। वर्ष 2014 के बाद से रेल पटरियों के निर्माण में लगभग आठ गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में रेल बुनियादी ढांचे का यह विस्तार न केवल यातायात को सुगम बना रहा है, बल्कि राज्य को आर्थिक और औद्योगिक रूप से भी नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है।

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