दतिया। जिले में कार लूट के एक मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। मध्यप्रदेश डकैती एवं अपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के न्यायाधीश राजेश भंडारी ने आरोपी शालू उर्फ समीर खान को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹5 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है।
न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 392 (लूट) और मध्यप्रदेश डकैती एवं अपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम की धारा 13 के तहत दोषी माना है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
बहाने से किराए पर ली कार, रास्ते में लूटकर फरार : प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटौरिया ने बताया कि यह घटना 27 अगस्त 2018 की है। आरोपी शालू उर्फ समीर खान अपने साथियों अमित यादव और शेरू उर्फ शेखू मंसूरी के साथ फरियादी वीरेंद्र दोहरे और वाहन मालिक आकाश साहू के पास पहुंचे थे। आरोपियों ने बहाना बनाया कि उन्हें अपनी बहन को समथर से भांडेर लाने के लिए मारुति ओमनी वैन किराए पर चाहिए।
फरियादी वीरेंद्र दोहरे उन्हें वाहन में लेकर समथर की ओर रवाना हो गया। रास्ते में आरोपियों ने अलग-अलग बहाने बनाकर गाड़ी इधर-उधर घुमवाई और रात में वापस लौटते समय भांडेर की ओर चलने को कहा।
ढाबे के पास वारदात को दिया अंजाम : रात करीब 9:30 बजे पाल ढाबा के पास एक आरोपी ने फ्रेश होने का बहाना बनाकर गाड़ी रुकवाई। जैसे ही वाहन रुका, आरोपियों ने चालक वीरेंद्र दोहरे पर हमला कर दिया। एक आरोपी ने उसका गला पकड़ लिया, जबकि दूसरे ने उसके हाथ पकड़कर उसे गाड़ी से नीचे फेंक दिया। इसके बाद तीनों आरोपी मारुति ओमनी वैन, मोबाइल फोन और पर्स लूटकर मौके से फरार हो गए।
अलग-अलग सुनाए गए तीनों आरोपियों के फैसले : घटना के बाद पीड़ित ने थाना पंडोखर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्रित कर न्यायालय में चालान पेश किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 7 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इस बीच आरोपी शालू उर्फ समीर खान फरार हो गया था, जिसके कारण उसके मामले की सुनवाई अलग से की गई।
इससे पहले सह-आरोपी अमित यादव को 8 नवंबर 2024 और शेरू उर्फ शेखू मंसूरी को 3 दिसंबर 2024 को न्यायालय द्वारा 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
बाद में फरार आरोपी शालू उर्फ समीर खान न्यायालय में पेश हुआ। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उसे भी दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सश्रम कैद और ₹5000 के जुर्माने की सजा सुनाई। आदेश के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया।

