पंडोखर धाम महोत्सव में बढ़ेगा आध्यात्मिक उत्साह : देवकीनंदन ठाकुर एवं करौली सरकार होंगे शामिल, श्रद्धालुओं में उमंग

दतिया। पंडोखर धाम में आयोजित 30वें वार्षिक महोत्सव को लेकर क्षेत्र सहित दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्ति, आस्था और सनातन संस्कृति के इस महापर्व में अब एक और विशेष अवसर जुड़ने जा रहा है, जब अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक एवं सनातन धर्म के प्रचारक देवकीनंदन ठाकुर महाराज महोत्सव में शामिल होंगे। उनके आगमन की खबर से श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह और उल्लास का माहौल बना हुआ है।

पंडोखर धाम पहुंचने पर देवकीनंदन ठाकुर महाराज सबसे पहले श्री बालाजी मंदिर में विराजमान पंडोखर सरकार श्री हनुमान जी के दर्शन करेंगे। इसके पश्चात वे धाम के पीठाधीश्वर  गुरु शरण  महाराज से भेंट करेंगे। इस दौरान वे महोत्सव के अंतर्गत चल रहे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और सेवा कार्यों का अवलोकन भी करेंगे, जिससे आयोजन की भव्यता और व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें।

महोत्सव की भव्यता में होगा विस्तार : पंडोखर धाम ट्रस्ट के संस्थापक एवं सचिव मुकेश कुमार गुप्ता (सागर) ने जानकारी देते हुए बताया कि देवकीनंदन ठाकुर महाराज धाम परिसर में संचालित धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ मेला क्षेत्र का भी भ्रमण करेंगे। उनके आगमन से न केवल महोत्सव की गरिमा बढ़ेगी, बल्कि श्रद्धालुओं को भी उनके दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

करौली सरकार भी रहेंगे शामिल : महोत्सव के इस विशेष अवसर पर उत्तर प्रदेश के कानपुर से प्रसिद्ध करौली सरकार भी कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे। वे 7 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक आयोजनों में शामिल रहेंगे। दोनों ही संतों की उपस्थिति से पंडोखर धाम में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का वातावरण और अधिक सशक्त होगा।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर : श्रीराम महायज्ञ और महोत्सव में पहले से ही हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन शामिल हो रहे हैं। ऐसे में देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में भक्तों को धर्म, भक्ति और जीवन मूल्यों से जुड़ी प्रेरणाएं प्राप्त होंगी। आयोजन समिति का मानना है कि यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक साबित होगा।

पंडोखर धाम में चल रहा यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का भी एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।

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