नई दिल्ली : चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 ने लैंड करके इतिहास रच दिया है। इससे पहले दुनिया के किसी देश ने यह कीर्तिमान नहीं रचा ISRO के महान वैज्ञानिकों ने देश के माथे पर गौरव का यह स्वर्णिम ताज रखा है। भारत से पहले अमेरिका, सोवियत संघ (अभी रूस) और चीन ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर पाए हैं.
इस महत्वपूर्ण क्षण के बाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने आकाशगंगा की ओर अग्रसरण किया है। इस कार्यान्वयन के सफल होने से, भारत दुनिया के चौथा देश बन गया है जो चंद्रमा पर सफलता प्राप्त करने में सफल हुआ है।
ये है उद्देश्य : चंद्रयान-3 के मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर गहरे अंधकार में छिपे जल प्राप्त करना और चंद्रमा के भौतिक और जैविक तत्वों की खोज करना है। इसके साथ ही, यह मिशन भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षमता में वृद्धि का भी प्रतीक है।
चंद्रयान-3 के मून लैंडिंग के बाद, अब हमारे वैज्ञानिकों का अगला कदम चंद्रमा के अध्ययन में आगे बढ़ना होगा, और हम नई जानकारियों की खोज करने की दिशा में अग्रसर होंगे। चंद्रयान-3 के सफलता के साथ, भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नई पूँजी बनाई है और हम आगे बढ़कर भविष्य में और भी उत्कृष्ट कार्यान्वयन करेंगे।
Historic day for India’s space sector. Congratulations to @isro for the remarkable success of Chandrayaan-3 lunar mission. https://t.co/F1UrgJklfp
— Narendra Modi (@narendramodi) August 23, 2023
PM बोले- अब चंदा मामा दूर के नहीं : वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद प्रधानमंत्री ने कहा की हमारे वैज्ञानिकों के परिश्रम और प्रतिभा से भारत, चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा है, जहां आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच सका है।
अब आज के बाद से चाँद से जुड़े मिथक बदल जाएंगे, कथानक भी बदल जाएंगे, और नई पीढ़ी के लिए कहावतें भी बदल जाएंगी। भारत में तो हम सभी लोग धरती को माँ कहते हैं और चाँद को मामा बुलाते हैं। कभी कहा जाता था, चंदा मामा बहुत ‘दूर’ के हैं। अब एक दिन वो भी आएगा जब बच्चे कहा करेंगे- चंदा मामा बस एक ‘टूर’ के हैं।


