नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने देशद्रोह कानून पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने भारतीय दंड संहिता की धारा-124 ए (देशद्रोह) का फिर से परीक्षण और पुनर्विचार करने का फैसला किया है। IPC की धारा 124A के प्रावधानों पर सरकार दोबारा विचार और जांच करेगी। केंद्र ने कोर्ट में एक हलफनामा दिया है।
जिसमें अपील की गई है कि इस मामले पर सुनवाई तब तक न की जाए, जब तक सरकार जांच न कर ले। इस मामले की सुनवाई CJI एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस सूर्यकांत त्रिपाठी और जस्टिस हिमा कोहली भी शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस विषय पर व्यक्त किए गए विभिन्न विचारों से अवगत रहे हैं और समय-समय पर विभिन्न मंचों पर नागरिक स्वतंत्रता, सम्मान की रक्षा के पक्ष में अपने स्पष्ट और स्पष्ट विचार व्यक्त किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर एक नए हलफनामे में केंद्र ने कहा, “आजादी का अमृत महोत्सव (स्वतंत्रता के 75 वर्ष) की भावना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि में, भारत सरकार ने धारा 124ए, देशद्रोह कानून के प्रावधानों का पुनरीक्षण और पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है.” सरकार ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर मामले में फैसला करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा की प्रतीक्षा करने का आग्रह किया


