गन्ना उत्पादक दतिया जिला बनेगा गुड का हब, बाहर भेजा जाएगा यहां बना गुड

दतिया ।  जिले में गन्ने की पैदावार काफी मात्रा में होती है। गन्ने की उपज को देखते हुए दतिया जिले की पहचान गुड़ हब के रूप में बनाए जाने की तैयारियां शुरु की जा रही है। बता देें कि जिला सहित आसपास के अन्य क्षेत्रों में लगभग एक लाख हेक्टेयर में गन्ने का उत्पादन होता है। इसी वजह से जिले में बहुतायत मात्रा में गड़ का उत्पादन क्रशर के माध्यम से किया जाता है। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत जिले के उद्योगपतियों एवं गन्ना उत्पादक कृषकों से कलेक्टर संजय कुमार ने चर्चा करते हुए जिले में उन्नत किस्म के गन्ने की बंपर पैदावर को देखते हुए दतिया को गुड हव के रूप में विकसित कर गुड निर्माण के क्षेत्र में जिले की पहचान बनाने की कोशिश की जा रही है। जिससे जिले के कृषकों द्वारा निर्मित गुड को बाहर निर्यात करने से गन्ना किसानों एवं गुड उत्पादकों को बेहतर दाम मिलने लगेंगे।

कलेक्टर ने इस बारे में जानकारी न्यू कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में आयोजित जिला निर्यात प्रोत्साहन समिति एवं जिला स्तरीय लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड की बैठक में दी । बैठक में औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े उद्योगपति, गन्ना उत्पादक कृषक उपस्थित रहे । बैठक में उपस्थित उद्योगपतियों एवं गन्ना उत्पादक कृषकों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए सुझाव भी दिए।

जिले का गुड भेजा जाएगा बाहर

कलेक्टर ने कहा कि जिले में कृषि उत्पादों पर केन्द्रित उद्योग स्थापित करने की अपार संभावना है। कृषि उत्पादित केन्द्रों पर उद्योग स्थापित कर जिले को एक अलग पहचान दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जिले में उन्नत किस्म के गन्ने की बंपर पैदावार को देखते हुए जिले को गुड हब के रूप में विकसित कर बाहर निर्यात करने से जिले को एक अलग पहचान मिलेगी। जिससे गन्ना उत्पादक कृषकों एवं गुड़ उत्पादकों को बेहतर दाम मिलेंगे। इसके साथ ही गुड़ उत्पादन से निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से भी किसानों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहाकि राज्य सरकार भी एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत हम गन्ने का चयन कर सकते हैं। इससे जहां गन्ना किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे वहीं गुड़ निर्माण के मामले में जिले को नई पहचान मिलेगी।

कृषि विज्ञान केंद्र देगा प्रशिक्षण

कलेक्टर ने जिले के कृषक जेपी बंसल द्वारा जैविक गुड़ का निर्माण किए जाने पर उनकी सराहना की। उनकी मांग पर उन्होंने कहाकि कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के माध्यम से जैविक गुड निर्माण का प्रशिक्षण भी प्रदाय किया जाएगा। जिससे वैल्यू एडीशन के साथ गुड उत्पादक बेहतर क्वालिटी का गुड निर्माण कर सकें। इसके लिए हमें गुड की मार्केटिंग पैकेजिंग आदि पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। कलेक्टर ने बताया कि जिले में गन्ने के अलावा, अमरूद, पपीता, टमाटर तथा अरबी कृषि उत्पादांे पर केंद्रित लघु उद्योग भी स्थापित कर स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जा सकता है, इस पर भी विचार होगा।

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