राज्यसभा में गतिरोध के लिए सरकार जिम्मेदार, 12 सदस्यों का निलंबन रद्द हो नहीं तो बैठेंगे धरने पर, खड़गे ने दी चेतावनी

नईदिल्ली :  राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ‘अशोभनीय आचरण’ के लिए 12 सांसदों को निलंबित किए जाने के बाद से राज्यसभा में चल रहे गतिरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मंगलवार को कहा कि अगर इन सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जाता है तो सदन सुचारू से चल सकता है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार सदन नहीं चलाना चाहती है।

उन्होंने संसद भवन के बाहर संवाददाताओं से कहा कि अगर निलंबन जल्द रद्द नहीं हुआ तो राज्यसभा के विपक्षी सदस्य निलंबित सदस्यों के समर्थन में पूरे दिन धरने पर बैठेंगे।

खड़गे ने आरोप लगाया कि राज्यसभा में जो गतिरोध पैदा हो रहा है, उसके लिए सरकार जिम्मेदार है। हमने बहुत कोशिश की है कि सदन चले। हम बार-बार सदन के नेता और सभापति से हमने बार-बार यही कहा कि आप नियम तहत ही निलंबित कर सकते हैं, लेकिन आपने नियम को छोड़ दिया और मानसून सत्र की घटनाओं के लिए हमारे 12 सदस्यों का गलत तरीके से निलंबित किया।

उनके मुताबिक, निलंबित करने से पहले सदस्यों को नामित किया जाना चाहिए। इसके बाद प्रस्ताव आता और फिर निलंबन होना चाहिए। यह भी उसी दिन यानी 11 अगस्त 2021 को होना चाहिए था।

खड़गे ने दावा किया विपक्षी सदस्यों को अलोकतांत्रिक तरीके से निलंबित किया गया है। हम बार बार सभापति से निवेदन कर रहे हैं कि हमारे सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना आपका फर्ज है। क्या वह सरकार के दबाव में हैं, यह हमें मालूम नहीं है।

उन्होंने कहाकि इस सत्र में हम बहुत मुद्दे उठाने चाहते थे। इससे पहले 12 सदस्यों को निलंबन रद्द करने का आग्रह किया। लेकिन सरकार नहीं मानी। ऐसा लगता है कि सरकार की मंशा चर्चा करने की नहीं है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहाकि हमारी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। मोदी जी तानाशाही तरीके सदन और सरकार चलाना चाहते हैं।

द्रमुक के तिरुची शिवा ने कहाकि हम शुरू से कह रहे हैं कि निलंबन का फैसला अलोकतांत्रिक है और नियमों के मुताबिक नहीं है। इसलिए हम इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा यह भी कहा कि सरकार एक तरह से यह आरोप लगाना चाहती है कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है, जबकि ऐसा नहीं है। लोकसभा में सभी दल चर्चा में शामिल हैं। राज्यसभा में सदस्यों के अधिकारों और संसद के सुचारू से चलाने के लिए लड़ रहे हैं। सिर्फ निलंबन रद्द करने से ही सदन चल सकता है।

पिछले सप्ताह सोमवार, 29 नवंबर को आरंभ हुए संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को इस सत्र की शेष अवधि के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था।

जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।

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