ताइपे : ताइवान और चीन के संबंध बीते 40 वर्षों के कालखंड में इस समय सबसे निचले स्तर पर हैं। हाल के दिनों में चीन के लड़ाकू विमानों की रिकार्ड घुसपैठ ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया है। ताइवान पर चीन के हमले की आशंका पैदा हो गई है। ताइवान ने अपनी सुरक्षा के लिए नई तैयारियां शुरू कर दी हैं।
लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि ताइवान को लेकर उनकी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से बात हुई है। अमेरिका और चीन ताइवान को लेकर अपनी नीति पर कायम हैं। चीन को संयम बरतने के लिए कहा गया है। चीन वन चाइना पालिसी के तहत ताइवान को अपना प्रांत मानता है जबकि ताइवान इस पालिसी को अस्वीकार करता है।
ताइवान चीन के दावे को दरकिनार करते हुए दशकों से अपना लोकतांत्रिक स्वरूप कायम किए हुए है और वहां पर चुनी हुई सरकार सत्ता में है। दुनिया के 15 देशों ने ताइवान को स्वतंत्र देश के रूप मान्यता भी दे रखी है और अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ताइवान का समर्थन करता है।
लेकिन चीन के दबाव के चलते अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ताइवान को अभी तक अपना सदस्य नहीं बनाया है। 2005 में चीन की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर सरकार को ताइवान पर जबरन कब्जे का अधिकार दे रखा है।
इसी के चलते चीन की वायुसेना और नौसेना जब-तब ताइवान के सीमा क्षेत्र में घुसपैठ करती हैं। चीन इसे अपना क्षेत्र बताते हुए इस घुसपैठ को जायज भी ठहराता है।
बीते शुक्रवार से मंगलवार तक चीन के लड़ाकू विमानों ने 150 बार ताइवान की वायु सीमा में घुसपैठ कर उसका उल्लंघन किया है। इसी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एकाएक बढ़ गया है। ताइवान ने कहा है कि चीन उसका लगातार उत्पीड़न कर रहा है। रक्षा मंत्री चियू कुओ-चेंग ने संसद में कहा कि चीन के साथ रिश्ते बीते 40 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर हैं।
उसके साथ सैन्य टकराव का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में कुछ नए रक्षा उपकरणों की जल्द खरीदारी जरूरी हो गई है। वैसे ताइवान आगामी पांच वर्षों में 8.6 अरब डालर (करीब 65 हजार करोड़ रुपये) के रक्षा उपकरणों की खरीद की योजना पर कार्य कर रहा है। चीन ने साफ कहा है कि वह ताइवान पर बलपूर्वक कब्जा कर सकता है क्योंकि वह उसका हिस्सा है।
जबकि ताइवान ने कहा है कि वह हर संभव तरीके से अपनी आजादी की रक्षा करेगा। चीन की आक्रामकता जिस हिसाब से बढ़ रही है, माना जा रहा है कि 2025 तक वह ताइवान पर हमला कर देगा। इस बीच अमेरिका ने कहा है कि वह ताइवान की सुरक्षा के लिए वचनबद्ध है। अमेरिका ने चीनी विमानों की घुसपैठ की भी निंदा की है।
फ्रांसीसी सांसदों का दल पहुंचा ताइपे
चीन के साथ बढ़े तनाव के बीच फ्रांस के सांसदों का दल पांच दिन के दौरे पर ताइवान पहुंच गया है। सीनेटर एलेन रिचर्ड के नेतृत्व में यह दल राष्ट्रपति साई इंग-वेन और अन्य शीर्ष नेताओं से मिलेगा।
रिचर्ड पूर्व में फ्रांस के रक्षा मंत्री रह चुके हैं। वह 2015 और 2018 में भी ताइवान आ चुके हैं। वह फ्रांसीसी संसद में ताइवान मैत्री समूह के प्रमुख भी हैं। फ्रांस में चीन के राजदूत के फ्रांसीसी दल के ताइवान दौरे को लेकर दिए गए विरोध और चेतावनी पत्र के बावजूद रिचर्ड के नेतृत्व में यह दौरा हो रहा है।
ट्रंप ने जताई युद्ध की आशंका
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और चीन के बीच युद्ध की आशंका जताई है। कहा है कि जो हालात बन रहे हैं उनमें चीन लंबे समय तक अमेरिका का सम्मान नहीं करेगा। अमेरिका की कमजोर और भ्रष्ट सरकार हालात को नहीं संभाल पा रही है। इसका नतीजा युद्ध होगा। इस बीच अमेरिका और चीन के बीच पैदा हो रहे तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों ने ज्यूरिच में मुलाकात की है। दोनों ने तनाव कम करने के लिए संवाद बढ़ाए जाने पर बल दिया है।


