गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव, 40 साल पुराने रासायनिक कचरे का सुरक्षित निष्पादन !

भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भोपाल गैस त्रासदी देश की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक रही है। 2 और 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात मिथाइल आइसोसायनाइट (एमआईसी) गैस रिसाव से हजारों परिवार प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि लगभग 40 वर्षों तक पड़े रासायनिक कचरे का माननीय उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में बिना पर्यावरणीय क्षति और मानव हानि के सुरक्षित निष्पादन का कार्य राज्य सरकार द्वारा पूरा किया गया है। सरकार गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी है और उनके कल्याण में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।

यूनियन कार्बाइड परिसर का गहन निरीक्षण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को आरिफ नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों से परिसर विकास और स्मारक निर्माण की योजना की जानकारी ली।

समुचित विकास के लिए सभी आवश्यक प्रबंध : मुख्यमंत्री ने कहा कि रासायनिक कचरे का निष्पादन पूर्ण होने के बाद अब यूनियन कार्बाइड परिसर को योजनाबद्ध रूप से विकसित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि समाज के सभी वर्गों और प्रभावित पक्षों को विश्वास में लेकर परिसर में भोपाल गैस त्रासदी स्मारक का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बिना सेफ्टी मास्क के परिसर के कोर एरिया में पहुंचे और स्थल का बारीकी से मुआयना किया, जिससे परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा की पुष्टि हुई।

न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण पालन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह निष्पादन कार्य विश्व के लिए उदाहरण है कि आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से जहरीले कचरे को सुरक्षित रूप से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राजधानी भोपाल के माथे से एक ऐतिहासिक कलंक मिटाने का कार्य किया है और इसके लिए सभी संबंधित विभाग बधाई के पात्र हैं।

विकास को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर शहरी विकास और सुशासन की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय इसी सोच का परिणाम है, जिससे राजधानी क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

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