पीतांबरा पीठ का भव्य मुख्य द्वार नए साल में होगा शुरू,मंदिर को और भव्य स्वरूप देने पर भी किया जा रहा विचार
दतिया. पीतांबरा पीठ का भव्य द्वार दिसंबर अंत तक या नए साल में पूरा होकर श्रद्धालुओं के लिए शुरू हो जाएगा। पीतांबरा पीठ में वर्तमान में पश्चिम द्वार और दक्षिण द्वार सहित कुल 3 द्वार हैं, नए भव्य द्वार बनने के बाद पीतांबरा मंदिर के लिए चार द्वार हो जाएंगे। अति सुंदर और धर्म के प्रतीक स्वरूप पीतांबरा पीठ के इस निर्माणाधीन मुख्य द्वार के शुरू होते ही अन्य तीन द्वार भी निकासी के लिए चालू रहेंगे। इसके साथ ही पीतांबरा मंदिर से मां को अर्पित किया जाने वाला सिंदूर, प्रसाद व यज्ञ की भभूत भी श्रद्धालुओं को ऑनलाइन भिजवाने की व्यवस्था की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पीतांबरा पीठ मंदिर में न्यास मंडल की बैठक गत दिवस संपन्न हुई । बैठक में अनेक निर्णय लिए गए । दक्षिण द्वार के समीप ही भव्य विशालकाय मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है। इस प्रवेश द्वार में एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को प्रवेश दिया जा सकता है। इस द्वार की मुख्य विशेषता यह है कि यहां आपातकालीन लाइटिंग के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल व्यवस्था और अन्य किसी आपात स्थिति में तुरंत राहत दिए जाने संबंधित व्यवस्था भी की जा रही है। इस द्वार का निर्माण लंबे समय से चल रहा है। गत दिवस हुई न्यास की मंडल की बैठक में ऑनलाइन प्रसाद भेजने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई है। पीतांबरा पीठ के प्रशासक महेश दुबे ने बताया कि यह व्यवस्था अभी वैचारिक तौर पर ही है। इसके अलावा ऑनलाइन प्रसाद के साथ ही माता का सिंदूर, यज्ञशाला में आयोजित यज्ञ की भभूति और माई को चढ़ा हुआ प्रसाद भी श्रद्धालुओं को भेजने पर विचार किया गया है। श्री पीतांबरा न्यास मंडल की बैठक में मां पीतांबरा के मंदिर को भव्य स्वरूप देने की बात भी रखी गई है, जिसे विचार विमर्श के बाद अभी लंबित कर दिया गया है।

संक्रमण और ट्रेनों के बंद होने से कम हुए दर्शनार्थी

इस नवरात्रि पर कोरोना संक्रमण के भय और ट्रेनों की आवाजाही कम होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भारी कमी आई है। बताया जाता है कि सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर प्रतिदिन 60 से 70 हजार श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते थे, जबकि इस बार कुल पूरी नवरात्रि में डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं ने ही दर्शन किए है। इस संदर्भ में एडीएम सुजान रावत ने बताया कि महाकाल की तर्ज पर पीतांबरा पीठ मंदिर के लिए भी प्रशासन कार्य करेगा, ताकि भक्त अधिक से अधिक मां के आशीर्वाद और दर्शन का लाभ ले सके।

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