Datia News : दतिया । हमें अपने आसपास बिखरी जड़ी बूटियों के रूप में दी गई अमूल्य औषधि निधि का संरक्षण करना चाहिए। कोरोना काल ने यह सिखा भी दिया है। इंटेक प्रयास करेगा कि बुंदेलखंड में बिखरी ज्ञात और अज्ञात औषधि को संरक्षित किया जाए। इसकी जिम्मेदारी दतिया शाखा को दी जाएगी। उक्त विचार इंटेक के चेयरमैन कर्नल एलके गुप्ता ने दतिया शाखा द्वारा आयोजित बेविनार में व्यक्त किए।
उन्होंने कहाकि बुंदेलखंड की संस्कृति में आयुर्वेद का बड़ा महत्त्व है। इसलिए यह विशेष कार्य इंटेक दतिया को सौंपा गया है। बुंदेलखंड की औषधि विरासत विषय पर आयोजित बेविनार में की अध्यक्षता डा. श्रीवास्तव ने की। प्रमुख वक्ता के रूप में ओंमकार यादव वनस्पति शास्त्री फतेहपुर, डा. चित्रगुप्त श्रीवास्तव इतिहासकार झांसी, संतोष पटेरिया साहित्यकार महोबा, ज़ाकिर हुसैन गूग्गल विशेषज्ञ मुरैना उपस्थित रहे। संचालन विनोद मिश्र ने व आभार अरुण सिद्ध संयोजक द्वारा किया गया।
वेविनार में ओंकार यादव ने बुंदेलखंड में पाई जाने वाली छेबला, कुटाजारिया, टेलबेटिका, किर्किचिया कलिहारी और पंच महाबला के लक्षण और उपयोग के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने यहां पाई जाने वाली महत्वपूर्ण औषधि के संरक्षण के लिए कार्य किए जाने के बारे में सुझाव दिए। परिचर्चा में संतोष पटेरिया ने दूधी गुड़मार और एडी के महत्व को बताते हुए उपयोगी एवं आवश्यक बताया। डा. एके खरे ने कहाकि दतिया में कत्था कंजी ओर देशी बबूल प्रचुर मात्रा में पाए जाते है जो लाभकारी होने के साथ हमारे स्थानीय व्यापार में सहायक हो सकते है। आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें अपनी स्थानीय जड़ी बूटियों का संरक्षण करना चाहिए।
डा.चित्रगुप्त ने लोकल स्तर पर इलाज करने वाले व्यक्तियों को आगे की पीढ़ी को सिखाने के लिए बात कही। व्याख्याता मनोज दुबे, रवि भूषण खरे, डा. अनीता बुंदेला, विनोद तिवारी, डा. रेखा शर्मा, नेहा सोनी ने भी अपने विचार रखे। स्थानीय औषधि संरक्षण पर सुझाव देने वालों में रजनी अरजरिया, विजय बैरागी, पवन शर्मा, पवन वैद्य, आनंद मोहन सक्सेना, ऋषिराज मिश्रा, नित्या रावत, निधि रावत, कल्पना मिश्रा, सुनीता व्यास व इंटेक सदस्यगण तथा शोधार्थी शामिल रहे।


