संतों का दर्शन मिलन बड़े सौभाग्य से मिलता है, जैन मुनियों का आशीर्वाद लेने पहुंचे केंद्रीय मंत्री तोमर व प्रभारी मंत्री

Gwalior News : ग्वालियर । राजकीय अतिथि मेडिटेशन गुरु मुनिश्री विहसंत सागर महाराज व मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज के दर्शनों के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व प्रभारीमंत्री तुलसीराम सिलावट ग्वालियर पहुंचे। इस दौरान बीज निगम के अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल, भाजपा प्रवक्ता आशीष अग्रवाल व पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी आदि मंत्रीगण भी मुरार स्थित सीपी कॉलोनी दिगंबर जैन लाला मंदिर के पास िस्थत आर्यन संस्कार स्कूल में मौजूद रहे।

जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं प्रभारी मंत्री सिलावट ने मुनिराजों के चरणों में प्रणाम कर उन्हें श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद लिया। मुनिश्री विहसंत सागर महाराज ने आतिथियों को दमोह के पास स्थित पथरिया में होने वाले दिगंबर जैन विरागोदय तीर्थ महामहोत्सव जैन महाकुंभ 2023 के कार्यक्रम की पत्रिका देकर आमंत्रित किया।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 423 संतों के दर्शन मिलन मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। जैन कुंभ में जो मेरे लिए कार्य होगा वह सौभग्य की बात होगी।

उन्होंने कहाकि पुण्य से ही संतों की वाणी व उनका समागम मिलता है। प्रभारी मंत्री ने कहाकि देश व राष्ट्र संतों से चल रहा है। धर्म के इस पुण्य कार्य में पूरा समर्पित रहूंगा। वहीं आतिथियों का अनिल जैन, संजीव जैन, दिनेश जैन, राजेश जैन आदि ने दुपट्टा उड़ाकर व साफा पहनकर सम्मानित किया।

मुनिश्री विहसंत सागर महाराज ने सीपी कालोनी दिगंबर लाला जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति के जीवन में धर्म की शुरुआत यानी धर्म का शुभारंभ बुराई को भूलने से होती है। धर्म के निकट आना है या जाना है तो हर प्रकार की बुराइयांे को त्यागें। तभी हम धर्मात्मा बन सकते हैं।

भगवान महावीर ने बोधि के अनेक सूत्र दिए हैं। यह उन्हीं के लिए लागू होता है जो उनकी कक्षा को ज्वाइन करना चाहता है। भगवान महावीर का विद्यार्थी बनना बहुत बड़ा सौभाग्य है। जैन होने का मतलब भगवान महावीर का विद्यार्थी बनना है। जिंदगी की जितनी भी विपरीत परिस्थितियां व्यक्ति की परीक्षा की घड़ियां ही होती हैं।

मुनिश्री ने कहा कि अनेक प्रकार की सावधानियां रखने के बावजूद व्यक्ति बीमार क्यों पड़ता है। यह सब कर्म सत्ता का खेल है। नसीब, कर्म सत्ता जब आप के पक्ष में रहेंगे तो दुनिया के धनी व्यक्ति आप ही होंगे। कर्म को न्यायाधीश व्यक्ति को कैदी तथा जेलर को सुख और दुख देने वाला बताते हुए मुनिश्री ने कहाकि व्यक्ति के लिए कोई भी उसका परिजन या मित्र हो सकता है।

यानी आपकी जिंदगी से कोई भी जुड़ा है वह नसीब की वजह से सुख अथवा दुख दे सकता है। व्यक्ति को बुरा करने की इजाजत कोई और या किसी से नहीं वह स्वयं से ही मिलती है। मुनिराजों ने सीपी कालोनी मुरार दिगंबर लाला जैन मंदिर से डबरा के लिए गाजेबाजे के साथ मंगल पदबिहार किया।

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