दतिया : पंडोखर धाम में चल रहे 30वें महोत्सव के दौरान आयोजित श्रीराम महायज्ञ रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और पूर्णाहुति के साथ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। यज्ञ के समापन अवसर पर पूरे धाम परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बने।
यज्ञ की पूर्णाहुति के दौरान पंडोखर धाम के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज स्वयं यज्ञशाला में उपस्थित रहे। उन्होंने विधि-विधान के साथ हवन में भाग लेकर देवी-देवताओं का पूजन किया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पूरे वातावरण में गूंजते वैदिक मंत्रों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
आस्था के साथ दिया गया सत्संग का संदेश : पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गुरुशरण महाराज ने धर्म और सत्संग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संतों और विद्वानों की संगति मनुष्य को सही मार्ग पर ले जाती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। धार्मिक कथाओं और परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि श्रद्धा और भक्ति के मार्ग पर चलकर व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।
भंडारे में उमड़ा सेवा और समर्पण का भाव : महायज्ञ के समापन के बाद धाम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विशेष बात यह रही कि इस अवसर पर स्वयं गुरुशरण महाराज ने संतों को प्रसाद वितरित कर सेवा भाव का उदाहरण प्रस्तुत किया। पूरे आयोजन में अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संतुलन देखने को मिला।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समा : महोत्सव के तहत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला मंचन, हरदौल चरित्र और पारंपरिक बुंदेली प्रस्तुतियों ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति में लोक संस्कृति की झलक साफ नजर आई, जिसने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया।
इसके साथ ही नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को खूब आकर्षित किया। मंच पर हुए कत्थक नृत्य और भक्ति गीतों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया, जहां हर कोई तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करता नजर आया।
महोत्सव में जारी रहेगा भक्ति और संस्कृति का संगम : आयोजकों के अनुसार, महोत्सव के आगामी दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय और बाहरी कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस तरह पंडोखर धाम महोत्सव न केवल आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को भी नई पहचान दे रहा है।

