नई दिल्ली : भारत आने वाले ब्रिटेन के यात्रियों के साथ अपनाई गई जैसे को तैसा की नीति ने आखिर अपना रंग दिखा ही दिया। ब्रिटेन ने अपने यात्रा नियमों में बदलाव कर 37 देशों के वैक्सीन प्रमाण पत्रों को मान्यता देने का निर्णय किया है। सोमवार (11 अक्टूबर) से कोविशील्ड की दोनों डोज लेकर ब्रिटेन जाने वाले भारतीय यात्रियों को क्वारंटाइन नहीं होना पड़ेगा। इस फैसले से दोनों देशों के बीच वैक्सीन प्रमाणन को लेकर पैदा हुई अप्रिय स्थिति खत्म हो गई है।
यह जानकारी भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने दी। उन्होंने कहा कि 11 अक्टूबर से ब्रिटेन जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए कोविशील्ड या ब्रिटेन द्वारा अनुमोदित कोई अन्य टीका लगवाकर आने से क्वारंटाइन नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने सहयोग के लिए भारत सरकार को धन्यवाद भी दिया है।
उल्लेखनीय है ब्रिटेन ने पिछले दिनों भारत की कोविशील्ड को मान्यता देने से इन्कार कर दिया था। इस निर्णय की भारत द्वारा कड़ी आलोचना करने के बाद ब्रिटेन ने 22 सितंबर को अपनी गाइडलाइन में संशोधन कर कोविशील्ड को शामिल तो कर लिया लेकिन वैक्सीन लगवाकर आने वाले यात्रियों को कोई राहत नहीं दी।
उन्हें 10 दिन के लिए अनिवार्य क्वारंटाइन होना पड़ रहा था। ब्रिटेन के इस निर्णय के खिलाफ भारत ने भी जवाबी कदम उठाते हुए ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों के लिए 10 दिन का क्वारंटाइन अनिवार्य कर दिया। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद दोनों देशों के अधिकारी रास्ता निकालने की कोशिश में लगे।
इस बीच ब्रिटेन ने अपनी ताजा गाइडलाइन में परिवर्तन करते हुए भारत समेत 37 देशों के वैक्सीन प्रमाणन को मान्यता देने का निर्णय किया। नई व्यवस्था के तहत 11 अक्टूबर से ब्रिटेन जाने वाले जो भारतीय यात्री कोविशील्ड की दोनों डोज लगवा चुके होंगे उन्हें क्वारंटाइन नहीं होना पड़ेगा। उल्लेखनीय है सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआइआइ) की कोविशील्ड वैक्सीन को ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। हालांकि कोवैक्सीन की मान्यता का मामला विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास लंबित है।


