नई दिल्ली : केंद्रीय बजट में इस बार राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश किए गए इस बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाया गया है, जबकि आम करदाताओं के लिए इनकम टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। बजट भाषण में कर अनुपालन को आसान बनाने, दवाओं को सस्ता करने और परिवहन व शिक्षा ढांचे को मजबूत करने से जुड़े कई प्रावधान शामिल हैं।
रक्षा बजट में बढ़ोतरी : बजट में रक्षा व्यय को ₹6.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया गया है। यह कुल रक्षा बजट में लगभग 15.2 प्रतिशत की वृद्धि है।
सेना के आधुनिकीकरण और हथियारों की खरीद के लिए पूंजीगत व्यय को भी बढ़ाया गया है। पिछले वर्ष के ₹1.80 लाख करोड़ की तुलना में इस वर्ष ₹2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो करीब 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।
इनकम टैक्स से जुड़े प्रावधान : इनकम टैक्स स्लैब में इस बजट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, करदाताओं को राहत देते हुए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई है। अब संशोधित रिटर्न 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक दाखिल की जा सकेगी।
दवाओं पर आयात शुल्क में राहत : स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत देते हुए कैंसर की 17 दवाओं पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया है। पहले इन पर 5 प्रतिशत शुल्क लगता था।
इसके साथ ही हीमोफीलिया, सिकल सेल और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को भी ड्यूटी फ्री किया गया है।
हाईस्पीड रेल और परिवहन परियोजनाएं : बजट में देश में 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की गई है। प्रस्तावित कॉरिडोर इस प्रकार हैं:
● मुंबई – पुणे
● पुणे – हैदराबाद
● हैदराबाद – बेंगलुरु
● हैदराबाद – चेन्नई
● चेन्नई – बेंगलुरु
● दिल्ली – वाराणसी
● वाराणसी – सिलीगुड़ी
इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आयुर्वेद और मेडिकल टूरिज्म पर फोकस : बजट में 3 आयुर्वेदिक AIIMS स्थापित करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 5 मेडिकल हब विकसित किए जाएंगे।
शहरी विकास और शिक्षा से जुड़े ऐलान
● 5 लाख से अधिक आबादी वाले टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए ₹12.2 लाख करोड़ खर्च किए जाएंगे।
● 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी।
● देश के लगभग 800 जिलों में बालिकाओं के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे, प्रत्येक जिले में कम से कम एक हॉस्टल की योजना है।


