उत्तराखंड पुलिस बनी देश का 16वां बल जिसे मिला राष्ट्रपति निशान; अमित शाह ने किए 3 बड़े ऐलान

देहरादून/नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उत्तराखंड पुलिस को सर्वोच्च सैन्य व असैन्य सम्मान ‘राष्ट्रपति निशान’ (President’s Colour) प्रदान किया। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का 16वां ऐसा राज्य बन गया है, जिसके पुलिस बल को यह प्रतिष्ठित अलंकरण प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित शासन और पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

​गृह मंत्री ने कहा कि अपने स्थापना काल के 25 वर्षों में 13,000 जवानों से बढ़कर 26,000 से अधिक कार्मिकों तक का सफर तय करने वाली उत्तराखंड पुलिस के लिए यह गौरवशाली पल है। उन्होंने इस सम्मान को कर्तव्य पथ पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले 206 वीर बलिदानियों और सेवारत जवानों की निष्ठा को समर्पित किया।

​आपदा प्रबंधन से लेकर तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा तक अटूट भरोसा : गृह मंत्री ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में राज्य पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) के योगदान को रेखांकित किया:

  • ​आपदाओं में त्वरित रिस्पॉन्स: सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों के ऐतिहासिक बचाव अभियान सहित धराली, थराली और स्यानचट्टी जैसी भीषण दैवीय आपदाओं, भूस्खलन और वनाग्नि के दौरान उत्तराखंड पुलिस ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में संकट के समय सबसे पहले आईटीबीपी या उत्तराखंड पुलिस का जवान ही पहुंचता है।
  • ​चारधाम और धार्मिक पर्यटन की सुरक्षा: बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब, कैंची धाम और कुंभ मेले में हर महीने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा का सुचारू प्रबंधन राज्य पुलिस की उच्च कार्यदक्षता का प्रमाण है।
  • ​वाइब्रेंट विलेज और सीमांत सुरक्षा: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के साथ मिलकर पुलिस ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पलायन रोकने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके चलते लगभग 50 सीमांत गांवों में आबादी फिर से बसने लगी है।

​डिजिटल सुधार: 3 साल में न्याय और 2029 तक नशा-मुक्त भारत का संकल्प : कानून व्यवस्था और नई भारतीय न्याय संहिताओं के क्रियान्वयन पर गृह मंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

  • ​3 वर्ष में सजा की गारंटी: राज्य में इलेक्ट्रॉनिक अदालतों, एफएसएल और आईसीजेएस 2.0 के एकीकरण के जरिए ढांचागत सुधार पूरे किए गए हैं। गृह मंत्री ने आश्वस्त किया कि मई 2027 के बाद दर्ज होने वाली प्रत्येक एफआईआर में अभियुक्त को 3 साल की समय-सीमा के भीतर सजा दिलाई जाएगी, जिससे नागरिकों को ‘तारीख पर तारीख’ से मुक्ति मिलेगी।
  • ​सीसीटीएनएस रैंकिंग में शीर्ष: सीसीटीएनएस/आईसीजेएस 2.0 डैशबोर्ड में 93.46 के उत्कृष्ट स्कोर के साथ उत्तराखंड पुलिस ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान अर्जित किया है।
  • ​नशा-मुक्त देवभूमि: देश को नक्सल-मुक्त घोषित किए जाने के बाद अब सरकार का पूरा ध्यान नशा उन्मूलन पर है। 31 दिसंबर 2029 तक देश को पूरी तरह नशा-मुक्त बनाने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत अगले 3 वर्षों में उत्तराखंड को पूर्णतः ‘नशा-मुक्त देवभूमि’ बनाया जाएगा।

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