पणजी/नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा में निधन हो गया। 75 वर्षीय अभिनेता को सुबह उनके आवास पर अचानक गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) देकर उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल प्रशासन ने प्रोटोकॉल के तहत मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया है और चिकित्सकीय पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। उनके निधन की खबर से कला जगत, बॉलीवुड, मराठी रंगमंच और देशभर में उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
‘गमन’ से ‘संकल्प’ तक: अभिनय की एक अनूठी और बेबाक शैली : पांच दशकों के अपने लंबे फिल्मी सफर में नाना पाटेकर ने हर किरदार को अपनी रौबदार आवाज और स्वाभाविक अभिनय से जीवंत किया:
➝ शुरुआती सफर और यादगार फिल्में: वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से शुरुआत करने के बाद उन्होंने ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘यशवंत’ और ‘वेलकम’ जैसी अनगिनत यादगार फिल्मों में काम किया।
➝ सेना से जुड़ाव और कारगिल में सेवा: फिल्म ‘प्रहार’ के लिए उन्होंने सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री से बाकायदा कड़ा सैन्य प्रशिक्षण लिया था। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान वे भारतीय सेना के जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए अग्रिम मोर्चे पर भी तैनात रहे थे।
➝ अंतिम स्क्रीन अपीयरेंस: हाल ही में वे निर्देशक प्रकाश झा की चर्चित वेब सीरीज ‘संकल्प’ में मुख्य भूमिका निभाते हुए नजर आए थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि: ‘पीढ़ियों तक याद रहेंगे उनके किरदार’ : नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा:
“बहुत कम अभिनेताओं में वह गहराई, विशिष्टता और दमदार उपस्थिति होती है, जो नाना पाटेकर जी में थी। उन्होंने हर भूमिका में बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया और हमें ऐसे किरदार दिए जिन्हें पीढ़ियां याद रखेंगी। वे अपने बेबाक और स्पष्ट विचारों के लिए भी जाने जाते थे। हिंदी और मराठी सिनेमा में उनका योगदान अतुलनीय है। उनके निधन से एक बड़ी शून्यता पैदा हुई है। परिजनों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।”

