इस बार दो दिन विजया एकादशी : सर्वार्थ सिद्धि और त्रिपुष्कर योग है खास, जानिए व्रत विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व !
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विजया एकादशी व्रत कथा : शास्त्रों में एकादशी के व्रत को बहुत श्रेष्ठ और मोक्ष दिलाने वाला बताया गया है. हर माह में दो एकादशी के व्रत होते हैं. सभी एकादशी श्री हरि को समर्पित हैं और सभी के नाम अलग अलग होते हैं. फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि विजया एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पूर्व जन्म के पापों का अंत होता है,

vijaya ekadashi vrat katha sunayen : साथ ही ये एकादशी शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली और हर क्षेत्र में सफलता दिलाने वाली मानी जाती है. इस बार एकादशी तिथि दो दिन पड़ रही है, इस कारण भक्तों में व्रत की तिथि को लेकर संशय की स्थिति है. यहां जानिए विजया एकादशी व्रत की स​ही तिथि, व्रत विधि और महत्व के बारे में.(vijaya ekadashi vrat katha in hindi)

vijaya ekadashi vrat katha sunayen : हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है। सभी व्रतों में एकादशी का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। वहीं हर माह दो एकादशी आती हैं।

आपको बता दें कि फाल्गुन मास की शुरुआत हो चुकी है और फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी 27 फरवरी के दिन पड़ रही है। जिसे विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है।(vijaya ekadashi vrat katha in hindi)

विजया एकादशी व्रत कथा : आपको बात दें कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु जी की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है।

साथ ही शत्रुओं में पर जीत हासिल होती है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है।(vijaya ekadashi vrat katha in hindi)

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विजया एकादशी का महत्व

मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत व्यक्ति को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है. यदि आपको शत्रुओं ने घेर रखा है, तो आपको नारायण की शरण में जाकर​ विधिवत विजया एकादशी का व्रत रखना चाहिए. इससे आपको शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है.

भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इस व्रत का महत्व युधिष्ठिर को बताया था, जिसके बाद पाण्डवों ने कौरवों पर विजय की प्राप्ति हुई थी.(vijaya ekadashi vrat katha in hindi)

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विजया एकादशी की कथा

बताया जाता है कि लंका की चढ़ाई के रास्ते मे सागर आड़े आ रहा था। आगे जाने का कोई रास्ता दिखाई नहीं पड़ने पर श्रीराम ने चिंता व्यक्त करते हुए लक्ष्मण से पूछा कि हम आगे कैसे जा सकते हैं। तब लक्ष्मण ने कहा था

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कि थोड़ी दूरी पर वकदालभ्य मुनि का आश्रम है। हमें उनसे मार्गदर्शन लेना चाहिए। इसके बाद श्रीराम, लक्ष्मण समेत वकदाल्भ्य मुनि के आश्रम में पहुंचे। उन्हें प्रणाम करके अपना प्रश्न उनके सामने रख दिया। मुनिवर ने कहा हे

विजया एकादशी की कथा

राम आप अपनी सेना समेत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखें, इस एकादशी के व्रत से आप निश्चित ही समुद्र को पार कर रावण को पराजित कर देंगे। (vijaya ekadashi vrat katha in hindi)

श्री रामचन्द्र जी ने तब उक्त तिथि के आने पर अपनी सेना समेत मुनिवर के बताये विधान के अनुसार एकादशी का व्रत रखा और सागर पर पुल का निर्माण कर लंका पर चढ़ाई की। राम और रावण का युद्ध हुआ जिसमें रावण मारा गया।

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तब से इस एकादशी को विजया एकादशी के रूप में जाना जाता है। इस बारे में श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया था।(vijaya ekadashi vrat katha in hindi)

पौराणिक कथा के अनुसार, रामायण काल में रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था. उस दौरान भगवान श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण बहुत चिंतित हो गए थे. इस दौरान पवनपुत्र हनुमान जी की मदद से उनकी सुग्रीव से मुलाकात हुई,

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विजया एकादशी की कहानी

जिसके बाद वे वानर सेना की मदद से रावण की लंका पर चढ़ाई करने के लिए विशाल समुद्र के तट पर पहुंच गए. ऐसे में लंका पर चढ़ाई कैसे की जाए (क्योंकि उनके सामने विशाल समुद्र जैसी चुनौती थी) इसे लेकर उनको कुछ उपाय नहीं सूझ रहा था.

आखिर में उन्होंने समुद्र से ही लंका पर चढ़ाई करने के लिए मार्ग मांगा, लेकिन इसके बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली.(vijaya ekadashi vrat katha in hindi)

विजया एकादशी व्रत विधि

– इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का माता लक्ष्मी के साथ पूजन करें।

– पूजन में फल-फूल, गंगाजल, धूप, दीप और प्रसाद आदि का प्रयोग करें। इस व्रत में पूरे दिन निराहार रहा जाता है अगर ऐसा कर पाना संभव न हो तो आप किसी भी एक समय फलाहार कर सकते हैं। फलों के रस का सेवन भी इस व्रत में किया जा सकता है।

– एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करने के बाद अगले दिन सुबह यानी द्वादशी तिथि पर फिर से विष्णु पूजन करें। उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दक्षिणा दें और अपना व्रत खोल लें।

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विजया एकादशी का शुभ मुहूर्त और तिथि

1 – फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी यानि विजया एकादशी – 26 फरवरी शनिवार 10.39 मिनट सुबह

2 – फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का समापन – 27 फरवरी, रविवार 8.12 मिनट सुबह

3 – पंचांग के अनुसार उदयातिथि के मुताबिक, विजया एकादशी का व्रत रखने की तिथि – 27 फरवरी दिन रविवार

4 – विजय काशी का शुभ मुहूर्त – दोपहर 12.11 मिनट से 12.57 मिनट.
विजया एकादशी के दिन राहुकाल – 4.53 से 6.19 मिनट तक है.
व्रत पारण का समय – 28 फरवरी, 6.48 सुबह से 9.06 मिनट के बीच है

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