नई दिल्ली : 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कर्तव्य, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुशासन की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि “महान शक्ति के साथ महान जिम्मेदारी आती है” और प्रशासनिक अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में सरदार वल्लभभाई पटेल के उस ऐतिहासिक दृष्टिकोण का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने सिविल सेवाओं को “भारत की रीढ़” बताया था। उन्होंने कहा कि वर्षों से प्रशासनिक अधिकारियों ने इस परंपरा को बनाए रखते हुए देश की एकता और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के विजन को दोहराया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने, आवास उपलब्ध कराने और महिलाओं को सशक्त बनाने जैसे प्रयासों में प्रशासनिक तंत्र की अहम भूमिका रही है।
तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश का जिक्र करते हुए उन्होंने अधिकारियों को अपने कौशल को लगातार उन्नत करने की सलाह दी। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि सेवा वितरण और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बन सके।
उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक बदलाव का संकेत बताते हुए कहा कि यह “नारी शक्ति” के सशक्त उदय का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो समाज में बदलती सोच को दर्शाती है।
उन्होंने राज्यों से भर्ती नीतियों में सुधार कर प्रशासन में विविध विशेषज्ञता को शामिल करने का आग्रह किया। साथ ही अधिकारियों को चेताया कि वे किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव के आगे न झुकें और हर परिस्थिति में निष्पक्षता बनाए रखें।
कार्यक्रम में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे प्रतीकों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये राष्ट्र के प्रति समर्पण, सेवा और कर्तव्य भावना के प्रतीक हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से आह्वान किया कि वे देश के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहें।

