चौटाला की रिहाई के साथ ही हरियणा में बढ़ी सियासी तपिश, क्या बनेगा नया समीकरण?

चंडीगढ़ : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला सजा पूरी होने के बावजूद छह साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। लोक प्रतिनिधित्व कानून के अनुसार चौटाला अपनी रिहाई से छह वर्ष की अवधि तक अर्थात जून, 2027 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते।

हालांकि, रिहाई के बाद चौटाला के पास भारतीय चुनाव आयोग के पास उक्त कानून की धारा 11 के तहत याचिका दायर करने का विकल्प है, जिसमें छह वर्ष चुनाव नहीं लड़ पाने की अवधि को कम करने या पूर्णतया खत्म करने की प्रार्थना करने का विकल्प है।

छूट देने में तीन सदस्यीय चुनाव आयोग कानूनन सक्षम है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के वकील हेमंत कुमार ने बताया कि चुनाव आयोग सिक्किम के वर्तमान मुख्यमंत्री और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के नेता प्रेम सिंह तमांग के मामले में ऐसा कर चुका है।

सितंबर, 2019 में चुनाव आयोग ने तमांग को भ्रष्टाचार में सजा के बाद उन पर छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाने की रोक को घटाकर 13 महीने कर दिया था। आयोग ने यह निर्णय तमांग द्वारा जुलाई, 2019 में दायर एक याचिका पर लिया था। सजा के बाद तमांग अगस्त, 2025 तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकते थे,

परंतु चुनाव आयोग के फैसले के बाद वह 10 सितंबर 2019 के बाद चुनाव लड़ने के लिए कानूनी तौर पर सक्षम हो गए। इसी कारण वह सिक्किम विधानसभा का उपचुनाव चुनाव लड़ने में सक्षम हुए, क्योंकि मई 2019 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते समय वह विधायक नहीं थे।

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