सोई हुई आत्मा को जगाने के लिए धर्म आराधना जरुरी- मुनिश्री प्रतीक सागर

दतिया. समय बड़ा अनमोल है, समय को पकड़ना चाहो तो पकड़ नहीं सकते। बचपन, यौवन और बुढ़ापा आ कर चला जाता है। समय व्यतीत होता रहता है। हमें समय को हाथ से नहीं जाने देना है। धर्म, आराधना, त्याग को करके जीवन को सफल बनाना है। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने शनिवार को सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।

मुनिश्री ने कहा कि आत्मा को हित-अहित का भाव नहीं है। आज प्रमाद हमारे अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ है। आत्मा से प्रमाद को हटाना है, सोई हुई आत्मा को जगाने के लिए धर्म-आराधना करना है। बहार से सोना आलस्य, लेकिन आत्मा का सोना प्रमाद होता है। अपनी प्रवृत्ति को बदलकर इस आत्मा पर से प्रमाद को दूर करने के लिए पश्चाताप की भट्टी में सुलगना पड़ता है। जहां पश्चाताप होगा वहां वैराग्य पैदा होगा और वैराग्य से सांसारिक पदार्थों के प्रति आसक्ति नहीं रहती ।

सोनागिर में आज मनाया जाएगा 41 वां जन्म जयंती महोत्सव

चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर में क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागर का 41 वां जन्म जयंती महोत्सव आज 25 अक्टूबर रविवार को आचार्य श्री पुष्पदंत सागर सभा गृह अमोल वाली धर्मशाला भट्टारक कोठी के सामने में धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान संगीत, गुरू पूजन, आहार चर्या, नृत्य मंगलाचरण सहित महाआरती का आयोजन होगा। सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री प्रतीक सागर का जन्म भिंड में 13 अक्टूबर 1980 को हुआ था। उनका पूर्व नाम विनोद जैन है। 6 अप्रैल 1993 को मुनिश्री ने गृह त्याग कर 24 अप्रैल 1999 को पानीपत हरियाणा में गणाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज से गुरू दीक्षा ग्रहण की। मुनिश्री का जन्म जयंती समारोह का विशेष आयोजन सोनागिर में किया गया है।

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