नई दिल्ली: बीते दिनों आए चक्रवात टाक्टे ने महाराष्ट्र और गुजरात में खासा कहर बरपाया था। इससे सबक लेकर इस बार केंद्र सरकार, राज्य सरकारों व एनडीआरएफ जैसी एजेंसियों ने अभूतपूर्व बचाव इंतजाम किए जिससे मानव जीवन की हानि को बड़े पैमाने पर रोकने में सफलता मिली। -एनडीआरएफ ने देश में पहली बार सबसे अधिक 113 राहत टीमें तैनात कीं। -बंगाल व ओडिशा से कुल 20 लाख से अधिक लोगों को महज दो दिन में खतरनाक स्थानों से सुरक्षित निकाला गया। -बंदरगाहों व आयल रिफाइनरी में अतिरिक्त सावधानी बरती गई। पोत चक्रवात से दूर गहरे समुद्र में भेजे गए और बाकी सारी गतिविधियां बंद रहीं। -नौसेना ने तीन पोत तैयार रखे जबकि वायुसेना ने 102 लोगों व सामान को खतरे वाले स्थानों से निकाला।
आक्सीजन प्लांट की सुरक्षा भी चाकचौबंद रही। साथ ही, रेलवे ने चक्रवात से पहले ही 24 घंटे में 969 टन लिक्विड आक्सीजन देश के अन्य राज्यों तक पहुंचा दी। ओडिशा और बंगाल के तटीय इलाकों में कहर बरपाने के बाद चक्रवात यास कमजोर पड़ने लगा है।अति गंभीर श्रेणी से गंभीर श्रेणी के चक्रवात में परिवर्तित होकर यास झारखंड की तरफ बढ़ गया। बुधवार सुबह करीब सवा नौ बजे ओडिशा के भद्रक जिले के धामरा में चक्रवात यास तट से टकराया।
लैंडफॉल (तट से टकराना) करीब साढ़े चार घंटे तक चला और इस दौरान हवा की गति 130-145 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। बालासोर और भद्रक जिले के कई गांवों में समुद्र का पानी भर गया। यही स्थिति बंगाल के तटीय इलाकों की रही जहां पर्यटन स्थल दीघा में समुद्र का पानी घुस गया। गंगासागर का विख्यात कपिल मुनि मंदिर परिसर भी जलमग्न हो गया।
पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों के कई गांवों में पानी घुसने से बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान कृषि को पहुंचा। खेतों में समुद्र का लवण-युक्त पानी घुसने से तैयार फसलें नष्ट हो गई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अनुसार, बंगाल में चक्रवात से एक करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं जबकि तीन लाख घरों को नुकसान पहुंचा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) व राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के साथ अन्य एजेंसियां बचाव कार्य में जुटी हैं।
सेना, नौसेना व वायुसेना भी चक्रवात से इस जंग में सहयोग कर रही हैं। मुंबई एयरपोर्ट ने बुधवार को कोलकाता व भुवनेश्वर छह फ्लाइट रद कर दीं। ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त पीके जेना ने बताया कि स्थानीय लोगों की मदद से अब प्रशासन गांवों से समुद्र का गंदा पानी निकालने के काम में जुटा है। लैंडफॉल के बाद यास मयूरभंज जिले के रास्ते आगे बढ़ रहा है।
भारी बारिश से सिमलीपाल राष्ट्रीय पार्क में बुधबलांग नदी में फ्लैश फ्लड की आशंका पैदा हो गई। जिला प्रशासन नदी के दोनों किनारों से कुछ खतरे वाले स्थानों से लोगों को निकाल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आनंदपुर ब्लॉक के पंचूपल्ली गांव में एक व्यक्ति की पेड़ गिरने से मौत हो गई। हालांकि इसकी प्रशासन ने पुष्टि नहीं की है।
एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की भी खबर है। जेना ने कहा कि हवा की रफ्तार कम हो रही है और देर रात तक चक्रवात ओडिशा से झारखंड में प्रवेश कर जाएगा। पिछले 24 घंटे के दौरान ओडिशा में भीषण बारिश हुई है। सबसे अधिक बारिश चांदबली में (288 मिलीमीटर) हुई है। इसके अलावा भद्रक, बालेश्वर, कुजंग सहित कई इलाके में 200 मिमी से अधिक वर्षा हुई। कई स्थानों पर भीषण बारिश जारी है।
कोलकाता व आसपास नहीं हुआ अधिक नुकसान दूसरी तरफ, बंगाल में तटीय इलाकों में चक्रवात ने खासा उत्पात मचाया लेकिन, कोलकाता, हावड़ा, हुगली समेत कई जिले आंशिक रूप से प्रभावित हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि 134 तटबंध टूट गए और सैकड़ों पेड़ उखड़ गए हैं। प्रभावितों के लिए 18,000 राहत शिविर खोले गए हैं। 10 लाख तिरपाल वितरित किए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में 10 करोड़ रुपये मूल्य की राहत सामग्री भेजी जा रही है। साढ़े चार घंटे चला यास का उत्पात अलीपुर मौसम कार्यालय के अधिकारी संजीव बंदोपाध्याय ने बताया कि यास के लैंडफॉल की प्रक्रिया पूरी होने और इसके बाद करीब साढ़े चार घंटे तक बंगाल के विभिन्न जिलों में यास का उत्पात चला। बंगाल में चक्रवात के कहर के दौरान अधिकतम 155 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली।

